योजना के बंद पड़े होने से करीब बीस हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि बंजर

 किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर बनाई गई योजनाएं विभागीय अनदेखी के चलते ठप पड़ी हैं। बावजूद कोई सुध लेवा नहीं है। योजना के बंद पड़े होने से करीब बीस हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि बंजर पड़ चुकी है। लोगों ने मामले की जांच की मांग भी उठाई है। साथ ही योजना का लाभ दिलाए जाने की मांग की है। जलागम विभाग की अधिकांश योजनाएं लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद दम तोड़ रही हैं। अल्मोड़ा-हल्द्वानी हाइवे से सटे गगोरी गांव की करीब बीस हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि को सिंचित करने के लिए वर्ष 2017-18 में करीब सात लाख रुपए से अधिक की धनराशि से कोसी नदी से खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए योजना तैयार की गई।

मकसद था किसानों की भूमि सिंचित कर बेहतर उपज की पैदावार करना पर योजना शुरू होने से पहले ही दम तोड़ गई। योजना से किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए गुप्तेश्वर मंदिर के समीप बकायदा टैंक निर्माण भी किया गया। योजना सौर ऊर्जा से संचालित करने को बड़े-बड़े पैनल भी लगाए गए पर पर विभागीय अनदेखी के चलते आज तक खेतों तक पानी की बूंद तक नहीं पहुंची है जिसके चलते कई हेक्टेयर कृषि भूमि बंजर हो चुकी है। गुप्तेश्वर मंदिर के समीप बना टैंक झाड़ियों से पटा पड़ा है जो विभागीय अनदेखी की हकीकत बयां कर रहा है। सौर ऊर्जा के पैनल भी अब क्षतिग्रस्त होने लगे हैं। लोगों ने लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद लाभ न मिलने पर इसे सरकारी धन की बर्बादी करार दिया है। योजना की बदहाल हालत में पड़े होने से लोगों में गहरा रोष भी व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी बजट खर्च कर लाखों रुपये से योजना तो तैयार की गई पर ग्रामीणों को आज तक योजना का लाभ ही नहीं मिल सका है। लोगों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग भी उठाई है।

किसानों के लिए बनने वाली योजनाएं ही किसानों को धोखा दे जा रही हैं। कहीं योजनाओं के लिए बजट ही उपलब्ध नहीं है तो कहीं धड़ल्ले से बजट खर्च किया जा रहा है पर किसानों को योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा। गंगोरी गांव में बनी योजना विभागीय लापरवाही की हकीकत बयां कर रही है। अन्य गांवों में भी जलागम विभाग के कार्यों पर सवाल उठ रहे हैं। कई जगह बजट जारी किया गया है पर धरातल पर कार्य ही नहीं दिख रहा। मामले की जानकारी को परियोजना निदेशक डा. गणेश खाती व उपपरियोजना निदेशक राजेश रंजन से फोन पर संपर्क भी साधा गया पर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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