कोरोना महामारी से लड़ने के लिए कोविड- 19 वैक्सीन कारगर साबित; एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत

एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने कहा कि कोरोना महामारी से लड़ने के लिए कोविड- 19 वैक्सीन कारगर साबित हो रही है। लिहाजा इसके संक्रमण से अब घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से शारीरिक दूरी का पालन करने, मास्क पहनने, साबुन से अच्छी तरह से हाथ धोने जैसी नियमों का पालन करना जरूरी है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश की ओर से कोरोनाकाल में जन जागरुकता के उद्देश्य से कोविड-19 कम्यूनिटी टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इस टास्क फोर्स ने ऋषिकेश नगर, आसपास के क्षेत्रों, समीपवर्ती गांवों में अभियान चलाकर नागरिकों को इस बाबत जागरूक किया और विभिन्न विद्यालयों का भ्रमण कर विद्यार्थियों से इस महामारी पर चर्चा की। इस दौरान बातचीत के दौरान पता चला है कि छात्र- छात्राएं अभी भी कोरोना के सदमे से उभर नहीं पाए हैं। बातचीत में यह भी सामने आया है कि इन दिनों बढ़ते हुए कोरानो के केस विद्यार्थियों के लिए चिंता का विषय बन गए हैं।

अध्ययनों से ज्ञात हुआ कि देश में विद्यार्थी तीन स्तर पर हैं स्कूल, कॉलेज व विश्वविद्यालय लेवल। इन तीनों ही स्तर के विद्यार्थियों पर कोविड-19 की वजह से मानसिक, शारीरिक व आर्थिक स्तर पर दुष्प्रभाव पड़ा है। इसमें मानसिक रूप से प्रभावित होने वाले बच्चे चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन आदि से ग्रसित हैं व सामाजिक दूरी बढ़ने से उन्हें अकेले रहने की आदत हो गई है, जिसका दुष्प्रभाव उनके एकेडमिक लेवल पर पड़ रहा है। साथ ही कोविड के दौर में मोबाइल के माध्यम से अधिक कार्य करने से आंखों में ज्यादा जोर पडऩा, आंखों की दूसरी तकलीफें व थकावट आदि की समस्याएं भी बढ़ी हैं।

 एम्स ऋषिकेश कम्यूनिटी टास्क फोर्स के नोडल ऑफिसर डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि शिक्षकों को कोविड के खौफ के मद्देनजर छात्र छात्राओं में हो रहे मनोविकार एवं उनमें किसी भी प्रकार के शारीरिक व मानसिक बदलाव लक्षणों को पहचानने का प्रयास करना चाहिए। यथासंभव उनके प्रति आत्मीयता व सहानुभूति के साथ साथ कुशल व्यवहार रखना चाहिए।

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