lockdown, unlock और फिर lockdown से लोगो मे हो रही मानसिक समस्या

बार-बार होने वाले लॉकडाउन का आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ रहा है. बहुत लोग मानसिक अवसाद से गुजर रहे हैं, बार-बार होने वाले लॉकडाउन और अनलॉक की वजह से जीवन बिखरने लगा है. नौकरी, रोजगार, कमाई और पढ़ाई तो दूर की बात है, लोगों के लिए सामान्य जीवन जीना भी मुश्किल होता जा रहा है. कोलकाता स्थिति जर्मन कॉन्सुलेट ने भी नौ जुलाई से शुरू होने वाले लॉकडाउन को ध्यान में रखते हुए अपने कर्मचारियों की उपस्थिति न्यूनतम करने का फैसला लिया गया ।

   लॉकडाउन में ढील के बाद अचानक से कोरोना संक्रमण में आए उछाल के बाद असम से लेकर पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और केरल समेत कई राज्यों ने ज्यादा संक्रमित इलाकों में दोबारा सख्त लॉकडाउन लागू कर दिया है. इससे आम लोगों की धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही जिंदगी एक बार फिर बेपटरी हो गई है. 

   पश्चिम बंगाल में तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में 31 जुलाई तक पर्यटन से संबंधित तमाम गतिविधियों पर पाबंदी लगा दी गई है.  मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है, "संक्रमण बढ़ने की वजह से सरकार को मजबूरी में सख्ती करनी पड़ रही है. राज्य में मास्क पहनना अनिवार्य है. बिना मास्क के बाहर निकलने वालों को लौटा दिया जाएगा. कोरोना से उपजी परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए ही सरकार ने मास्क नहीं पहनने वालों पर कोई जुर्माना नहीं लगाने का फैसला किया है.”

कॉन्सुलेट की ओर से बुधवार को जारी एक ट्वीट में इसकी जानकारी दी गई है. इससे पहले केरल और कर्नाटक सरकारों ने भी इसी सप्ताह से सख्त लॉकडाउन लागू किया है. पूर्वोत्तर राज्य असम में कामरूप और जोरहाट जिले के विभिन्न इलाके सख्त लॉकडाउन में हैं. राजधानी गुवाहाटी भी कामरूप जिले के तहत ही है.

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