नई दिल्ली: भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष की गहराइयों से आने वाले एक रहस्यमयी रेडियो सिग्नल का पता लगाया है, जिसने वैज्ञानिक समुदाय में उत्सुकता बढ़ा दी है। यह सिग्नल एक निश्चित अंतराल पर बार-बार सक्रिय होता है, जो इसे सामान्य रेडियो संकेतों से अलग बनाता है।
इस खोज में Raman Research Institute और पुणे स्थित Giant Metrewave Radio Telescope (GMRT) की अहम भूमिका रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह सिग्नल हर कुछ मिनटों के अंतराल पर आता है और कई मिनटों तक सक्रिय रहता है, जो इसे बेहद अनोखा बनाता है। आमतौर पर अंतरिक्ष से मिलने वाले रेडियो सिग्नल कुछ सेकंड के होते हैं, लेकिन यह खोज एक नई श्रेणी की ओर इशारा करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकेत किसी Magnetar से उत्पन्न हो सकता है। मैग्नेटार दरअसल एक मृत तारे का अवशेष होता है, जिसका चुंबकीय क्षेत्र अत्यंत शक्तिशाली होता है। यह धीरे-धीरे घूमते हुए ऊर्जा के तीव्र विस्फोट के रूप में रेडियो तरंगें उत्सर्जित करता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के “लॉन्ग पीरियड रेडियो ट्रांजिएंट” (LPRT) ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में नई दिशा दे सकते हैं। यह खोज न केवल तारों के जीवन चक्र के बारे में हमारी समझ को बेहतर बनाएगी, बल्कि यह भी बताएगी कि अत्यधिक ऊर्जा वाले पिंड किस प्रकार व्यवहार करते हैं।
हालांकि, इस सिग्नल को लेकर आम लोगों में एलियन (परग्रही) से जुड़े कयास भी लगाए जा रहे हैं, लेकिन वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है। उनका ध्यान पूरी तरह वैज्ञानिक विश्लेषण पर केंद्रित है।
आगे के अध्ययन के लिए वैज्ञानिक इस सिग्नल की आवृत्ति, तीव्रता और स्रोत का गहराई से विश्लेषण कर रहे हैं। यदि यह एक नई खगोलीय घटना साबित होती है, तो यह अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।

