अब MPhil की डिग्री नहीं दी जाएगी ,हायर एजुकेशन में ये सुधार किये

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय का पुन: नामकरण शिक्षा मंत्रालय किया गया है। नई शिक्षा नीति की औपचारिक घोषणा केंद्रीय मंत्रियों प्रकाश जावड़ेकर और डॉ रमेश पोखरियाल निंशक ने संयुक्त रूप से की।
घोषणा के दौरान केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता आज कैबिनेट की बैठक में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई है।
नया अकादमिक सत्र सितंबर-अक्टूबर में शुरू होने जा रहा है और सरकार का प्रयास पॉलिसी को इससे पहले लागू करने का है।

हायर एजुकेशन में ये सुधार

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में 2035 तक उच्च शिक्षा में 50 प्रतिशत तक एनरोलमेंट का लक्ष्य निर्धारित, फिलहाल लगभग 15 प्रतिशत ही विद्यार्थी हायर एजुकेशन तक पहुंच पाते हैं।उच्च शिक्षा में अब मल्टीपल इंट्री और एग्जिट का विकल्प दिया जाएगा।
पांच साल के इंटीग्रेटेड कोर्स करने वालों को एमफिल नहीं करना होगा। अब कॉलेजों के एक्रेडिटेशन के आधार पर ऑटोनॉमी दी जाएगी। मेंटरिंग के लिए राष्ट्रीय मिशन चलाया जाएगा। हायर एजुकेशन के लिए एक ही रेग्यूलेटर रहेगा। अभी यूजीसी, एआईसीटीई शामिल हैं। हालांकि इसमें लीगल एवं मेडिकल एजुकेशन को शामिल नहीं किया जाएगा।
सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को लिए शिक्षा मानक समान रहेंगे। नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एनआरएफ) की स्थापना होगी जिससे रिसर्च और इन्नोवेशन को बढ़वा मिलेगा।
शिक्षा में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा, पिछड़े वर्गों को ज्यादा से ज्यादा शिक्षा से जोड़ना लक्ष्य
दिव्यांग फ्रेंडली एजुकेशन सॉफ्टवेयर तैयार होंगे
क्षेत्रीय भाषाओं में ई-कंटेंट तैयार किए जाएंगे
स्कूल, अध्यापक और छात्रों को डिजिटल टेक्नोलॉजी से जोड़ा जाएगा

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