शांत कही जाने वाली पहाड़ की वादियां अपराधियों को भी खूब भायी; वादियां बनी लाशों को ठिकाने लगाने का अड्डा

शांत कही जाने वाली पहाड़ की वादियां अपराधियों को भी खूब भा रही हैं। अन्य अपराधों में इजाफा होने के साथ ही अब पहाड़ की शांत वादियां लावारिस लाशों को ठिकाने लगाने का अड्डा बन रही है। यही कारण है कि बीते चार माह में मंडल पुलिस ने 38 लावारिस शव बरामद किए हैं। जिसमें से अब तक महज सात शवों की ही पुलिस शिनाख्त कर पाई है। जबकि अन्य शव अभी भी पुलिस के लिए पहेली बने हुए हैं। वही सख्ती के बावजूद अज्ञात शवों के मिलने का सिलसिला नहीं थमना पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े कर रहा है। राज्य और जिलों के बॉर्डर पर सघन चेकिंग अभियान चलाने के दावे करने वाली पुलिस को लगातार बढ़ते आंकड़े मुंह चिढ़ा रहे है।

 

शांत मानी जाने वाली पहाड़ की वादियां अब अपराधिक दृष्टिकोण से शांत नहीं रही। पहाड़ में चोरी की डकैती के साथ ही कई संगीन अपराध और हत्या करने के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वही हत्या कर लाशों को ठिकाने लगाने के लिए पहाड़ी जिले अपराधियों के लिए भी मुफीद साबित हो रहे हैं। खुद पुलिस के आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं। अज्ञात शव मिलने के लगातार बढ़ते मामले पुलिस के लिए भी चुनौती बने हुए हैं। आईजी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार मंडल भर में जनवरी से अप्रैल तक 38 अज्ञात शव बरामद किए गए हैं। जिसमें से पुलिस महज सात शवों की ही शिनाख्त कर पाई है। जबकि 31 शव अभी भी पुलिस के लिए पहेली बने हुए हैं।

पर्यटन क्षेत्र में खासी पहचान रखने वाला नैनीताल जिला अपराधिक गतिविधियों मैं भी पीछे नहीं है। जिले में बाहरी राज्यों से भारी संख्या में पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है। जिस कारण मौका परस्त अपराधी हत्या कर शवों को ठिकाने लगाने के लिए जिले की शांत वादियों में अवसर तलाशते दिख रहे हैं। यही कारण है कि मंडल भर में मिले अज्ञात शवों में से 50 फीसदी 19 शव नैनीताल जिले से बरामद किए गए हैं। जिसमें से अब तक महज दो शवों की ही पुलिस शिनाख्त कर पाई है।

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