उत्तराखंड: नए साल 2026 में श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा (हिमालयीय महाकुंभ) का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन हर 12 साल बाद होता है और आस्था का विशाल सैलाब लेकर आता है। 280 किलोमीटर लंबी इस पैदल यात्रा में सैकड़ों देवी-देवताओं की डोली और छंतोलियां श्रद्धालुओं को दर्शन देंगी।
बसंत पंचमी के दिन यानी 23 जनवरी को इस महाकुंभ के आयोजन का आधिकारिक कार्यक्रम जारी किया जाएगा। नौटी में राजवंशी राजकुंवर द्वारा इसे घोषित किया जाएगा। इसके पहले, 20 जनवरी से नौटी में भव्य महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। महोत्सव में देवी पूजन के साथ-साथ अन्य सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।
श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा की तैयारियों के लिए सरकार और समिति पिछले दो वर्षों से सक्रिय हैं। यात्रा के मार्ग में ढांचागत सुविधाएं बनाई जा रही हैं। सड़कों की मरम्मत की जा रही है और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए अनुमानित लागत तैयार कर ली गई है।
भव्य आयोजन और प्रतिनिधियों की भागीदारी:
यात्रा में गढ़वाल और कुमाऊं के राजवंश के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावनाएं हैं। यह आयोजन 20 दिनों तक चलेगा और लाखों श्रद्धालु इसमें हिस्सा लेने पहुंचेंगे।
श्रीनंदा देवी राजजात समिति के महासचिव भुवन नौटियाल ने कहा,
“यात्रा की तैयारियां पूरी तरह से व्यवस्थित हैं। श्रद्धालुओं के लिए सुविधा और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। कार्यक्रम में आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।”
श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को भी जीवंत बनाए रखने वाला प्रमुख महोत्सव है।
