प्रगतिशील काश्तकार विजय सिंह तड़ियाल ने खेती को बनाया आय का मुख्य जरिया

नगदी फसलें उगाकर दिखा रहे बेरोजगारों को स्वरोजगार राह

रघुभाई जड़धारी

जो लोग सोचते हैं कि गांव में रहकर पैसा नहीं कमाया जा सकता, उनको राह दिखाने का काम कर रहे हैं, प्रगतिशील काश्तकार विजय सिंह तड़ियाल। उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से खेती कर अपनी आर्थिकी मजबूत की है और दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बनकर भी उभरे हैं। वे आज नगदी फसलें उगाकर लाखों रूपए कमा रहे हैं।

नरेंद्रनगर प्रखंड के मौण(सालमखेत) निवासी 50 वर्षीय विजय सिंह तड़ियाल उन लोगों को राह दिखाने का काम कर रहे हैं जो कहते हैं कि गांव में रहकर पैसा नहीं कमाया जा सकता। उन्होंने साबित कर दिखाया है कि यदि मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो गांव में रहकर भी का पैसा कमाया जा सकता है। वे आज आधुनिक तरीके से खेती कर लाखों रुपए कमा रहे हैं। विजय सिंह तड़ियाल ने एमए, बीएड तक पढ़ाई की है। वे चाहते तो पलायन कर बड़े शहरों में नौकरी कर सकते थे, लेकिन उन्होंने नौकरी की मानसिकता त्याग कर बीस साल पूर्व खेती से जुड़ने का जो निर्णय लिया था वह आज फलदाई साबित हुआ है। वे वैज्ञानिक तरीके से नकदी फसलें उगा रहे हैं। वे नगदी फसलें उगाने के अलावा फूलों की खेती भी करते हैं। उनकी प्राथमिकता विविधितापूर्ण खेती करना है ताकि खाने के साथ शरीर में सभी प्रकार के पोषक तत्व पहुंच जाएं। इतना ही नही वे एक अच्छे पशुपालक भी हैं। भैंस, बैलों के अलावा उनके आंगन में अच्छी नस्ल की चार गाय भी बंधी हैं। जिनसे वे दूध विक्रय करते हैं। इससे भी उन्हें अच्छा पैसा मिल जाता है। खेती की अच्छी जानकारी व ज्ञान होने के कारण वे काश्तकारों को समय-समय पर प्रशिक्षण भी देते हैं।
जैविक तौर तरीकों से उगाते हैं नगदी फसलें।
विजय सिंह तड़ियाल करीब 40 नाली भूमि पर खेती करते हैं। वे मुख्य रूप से नगदी फसलें उगाते हैं। खास बात यह है कि वे जैविक तौर तरीकों से फसलें उगा रहे हैं। जैविक उत्पादों का उन्हें दाम अच्छा मिल जाता है। वे आलू, मटर, फूल गोभी, बंद गोभी, शिमला मिर्च, बीन, राई, मूली, ककड़ी, प्याज आदि दर्जनों प्रकार की सब्जियां उगा रहे हैं। अधिक ऊंचाई पर खेती करने के कारण तापमान को संतुलित करने के लिए उन्होंने अपने खेतों में चार पॉलीहाउस लगा रखे हैं। इनके अंदर तापमान नियंत्रित कर किसी भी सीजन में नकदी फसल उगाना आसान हो जाता है। टमाटर वे पोलीहाउस में ही उगाते हैं। खेती ही उनकी आय का मुख्य जरिया है। उनका कहना है कि यदि आधुनिक तौर-तरीकों से खेती की जाए तो उत्पादन अधिक होता है। इसलिए कोरोनाकाल में बेरोजगार हुआ युवा वर्ग जो खेती से जुड़ना चाहता है, वह पहले इसका अध्ययन करें और मेहनत करे तो लाभ जरूर होगा। वे कृषि व उद्यान विभाग से लगातार संपर्क करके विशेषज्ञों से तकनीकी जानकारी प्राप्त करते रहते हैं। जिसका लाभ उन्हें फसलें उगाने में होता है।
विजय सिंह तड़ियाल के काम की विभागीय अधिकारी भी सराहना करते हैं उनके काम को प्रेरणादायी बताते हैं। उनके बारे में जिला उद्यान अधिकारी डॉ डीके तिवारी का कहना है कि विजय सिंह तड़ियाल उच्च शिक्षित काश्तकार हैं और खेती के हर विषय की उन्हें अच्छी जानकारी है। जिसका लाभ उन्हें खेती में मिलता है। आज वे एक बेहतर प्रगतिशील काश्तकार के रूप में प्रेरणादायी कार्य कर रहे हैं। उनके काम से दूसरों को भी सीख लेनी चाहिए।
फोटो-मौण सालमखेत में अपने खेतों से खरपतवार निकालते प्रगतिशील काश्तकार विजय सिंह तड़ियाल।

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