उत्तराखंड में रिटायरमेंट के बाद पुनर्नियुक्ति करना नहीं होगा अब आसान

उत्तराखंड सरकारी विभागों में रिटायरमेंट के बाद पुनर्नियुक्ति या अनुबंध के आधार पर नौकरी आसान नहीं होगी। इसके लिए नियुक्ति प्राधिकारियों को कार्मिक से सहमति अनिवार्य रूप से लेनी होगी।

मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने यह आदेश किए। सभी अफसरों को भेजे आदेश में कहा गया है कि पुनर्नियुक्ति, संविदा पर तैनाती, नियोजन विधिक, प्राविधिक, वैज्ञानिक एवं ऐसी प्रकृति के पदों के लिए है, जहां विशेष प्रशिक्षण एवं दक्षता की जरूरत हो।

मगर, कुछ विभागाध्यक्ष, कार्मिक एवं सतर्कता की असहमति के बावजूद वित्त और सीएम का अनुमोदन लेकर रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को ओएसडी या फिर अन्य पदनाम पर रख रहे हैं। पुनर्नियुक्ति की वजह से राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।

रोका जाएगा वेतन: प्रशासकीय विभाग समूह ग और घ के ऐसे रिटायर कार्मिकों को भी रख रहे हैं, जो विशेष योग्यता नहीं रखते। यदि भविष्य में इस आदेश का उल्लंघन किया गया तो ऐसे पुनर्नियुक्ति पर लगे हुए कार्मिकों का वेतन रोका जाएगा। उन्हें जो भुगतान किया गया होगा उसकी भरपाई नियुक्त प्राधिकारी या डीडीओ से की जाएगी।

पुनर्नियुक्ति के वक्त प्रमाण पत्र देना होगा: मुख्य सचिव ने कहा कि, कई विभागों में बड़ा ढांचा मंजूर होने के बावजूद पुनर्नियुक्ति गलत है। अब यदि विभाग द्वारा किसी पद विशेष पर पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव कार्मिक विभाग में आया तो यह प्रमाण पत्र देना होगा कि विभाग के अन्य अफसर दायित्वों के निर्वहन में सक्षम नहीं हैं।

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