बिना टिकट यात्रा प्रकरण में ऋषिकेश-गुप्तकाशी मार्ग के रोडवेज बस परिचालक चंद्रमोहन भंडारी का हरिद्वार डिपो तबादला

बिना टिकट यात्रा प्रकरण में ऋषिकेश-गुप्तकाशी मार्ग के रोडवेज बस परिचालक चंद्रमोहन भंडारी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मंडल प्रबंधक संजय गुप्ता ने उसका हरिद्वार डिपो तबादला कर दिया। साथ ही डिपो एजीएम को आदेश दिए गए हैं कि हरिद्वार में ड्यूटी ज्वाइन करते ही उसका निलंबन कर दिया जाए। इसके अलावा बस चालक को ऑफ रूट कर मंडल प्रबंधक कार्यालय में अटैच किया गया है।

गुरुवार को ऋषिकेश डिपो की साधारण बस (यूके07पीए-2871) को गुप्तकाशी से लौटते वक्त प्रवर्तन टीम ने श्रीनगर के समीप चेक किया तो उसमें छह सवारी थीं, जिनमें तीन बेटिकट मिलीं। सवारी अगस्त्यमुनी से ऋषिकेश जा रही थीं। इस बस पर नियमित परिचालक चंद्रमोहन भंडारी तैनात था। इस दौरान उसके विरुद्ध 900 रुपये बेटिकट के दर्ज किए गए। रिपोर्ट मिलने पर शुक्रवार को मंडल प्रबंधक ने उसका हरिद्वार डिपो तबादला कर दिया। चूंकि निलंबन का अधिकार डिपो एजीएम को होता है, ऐसे में एजीएम को उसे निलंबित करने का आदेश दिया गया है।बेटिकट मामले में ऋषिकेश-गोपेश्वर मार्ग की बस ऋषिकेश डिपो की साधारण बस (यूके07पीए-4180) में 15 सवारी पकड़े जाने के मामले में विशेष श्रेणी परिचालक सन्नी गुंद को आफ रूट कर दिया गया है। उसे सेवा से बर्खास्त करने की कार्रवाई की जानी है मगर एजीएम ऋषिकेश पीके भारती के क्वारंटाइन होने के कारण इसमें वक्त लग सकता है। इसके अलावा दोनों चालक को भी आफ रूट किया गया है और जांच पूरी होने तक उनसे कोई कार्य न लेने के आदेश दिए गए हैं। दोनों चालक संविदा के हैं।

बेटिकट प्रकरण में परिचालक चंद्रमोहन भंडारी के खिलाफ हुई कार्रवाई सजा कम तोहफा ज्यादा लग रही। दरअसल, भंडारी का पिछला रिकार्ड बेहद दागी रहा है। उसे भ्रष्टाचार के मामले में हरिद्वार से ऋषिकेश भेजा गया था और अब फिर उसे ऋषिकेश से हरिद्वार भेज दिया गया। मृतक आश्रित में वह मई 1995 में भर्ती हुआ था। इसके बाद फरवरी-1996 में उसे निलंबित किया गया और जुलाई में चेतावनी देकर बहाल किया गया। नवंबर-1997 में उसकी एक साल की वेतन वृद्धि रोकी गई और अप्रैल 1998 में भ्रष्टाचार में उसके वेतन से एक हजार रुपये कटौती की गई।मई-1999 में फिर एक वर्ष की वेतन वृद्धि रोकी गई और दो वर्ष पुराने वेतन पर भेजा गया। यही नहीं जून-2005 में उसे दोबारा निलंबित किया गया और पांच वर्ष पुराने वेतन पर उसे भेज दिया गया। इसके बाद मार्च-2007 में उसे फिर निलंबित किया गया और मई-2007 में उसे बर्खास्त किया गया। फिर हाईकोर्ट के आदेश पर दोबारा सुनवाई कर उसे एक मौका और देते हुए नवंबर-2014 में बहाल किया गया। अक्टूबर-2016 में उसकी पांच वर्ष की वेतन वृद्धि रोकी गई। दागी रिकार्ड होने के बावजूद अब बेटिकट मामले में उसे वहीं हरिद्वार डिपो में भेज दिया गया, जहां से उसका तबादला हुआ था।

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