सचिन तेंदुलकर की कहानी बहुत आसान और प्रेरणादायक है। जब उन्होंने 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला वनडे मैच खेला, तो वे शून्य पर आउट हो गए। दूसरे मैच में भी उनका खाता नहीं खुला। शुरुआत इतनी खराब थी कि कोई भी सोच सकता था कि उनका करियर ज्यादा आगे नहीं जाएगा, लेकिन सचिन ने हार नहीं मानी।
शुरुआत में सचिन मिडिल ऑर्डर में बल्लेबाजी करते थे और ज्यादा खास प्रदर्शन नहीं कर पा रहे थे। फिर साल 1994 में एक बड़ा मौका आया। न्यूज़ीलैंड के खिलाफ मैच में ओपनर नवजोत सिंह सिद्धू चोटिल हो गए। तब सचिन ने खुद कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन से कहा कि उन्हें ओपनिंग करने दी जाए। कप्तान ने भरोसा दिखाया और उन्हें मौका दे दिया।
बस यही से सब बदल गया। सचिन ने पहली बार ओपनिंग करते हुए 49 गेंदों में 82 रन ठोक दिए। उन्होंने इतने शानदार तरीके से खेला कि सबको समझ आ गया कि यही उनका सही स्थान है।
इसके बाद सचिन ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। ओपनर बनने के बाद उन्होंने हजारों रन बनाए, कई शतक लगाए और दुनिया के सबसे महान बल्लेबाजों में शामिल हो गए। उनकी कहानी यह सिखाती है कि अगर शुरुआत खराब हो, तो भी सही मौका और आत्मविश्वास इंसान की पूरी जिंदगी बदल सकता है।

