सावन मेले में बने पारंपरिक पकवान, लगा रांसो-तांदी

पुरोला। कमल सिराई के करड़ा गांव में शिकारू नाग महाराज मेले में ग्रामीणों ने ग्रामीणों ने पारंपरिक रूप से स्थानीय पकवान बनाए और रांसो-तांदी गीत नृत्य में जमकर झूमें। पुरोला कमल सिरांई के 13 गांवों में इन दिनों मेले चल रहे हैं। शिकारू नाग महाराज के मेले की शुरुआत जयसाण थोक के खलाड़ी गांव से हुई।
नाग महाराज की पालकी पहुंची। ग्रामीणों ने ढोल-दमाऊं के साथ ग्रामीणों ने ईष्ट देवता की पालकी का भव्य स्वागत किया। जिसके बाद रविवार को सावन के मेले का आयोजन हुआ। पूरे दिन ग्रामीणों ने देवता की पूजा अर्चना की। साथ ही पारंपरिक पकवानों में स्वांले, पकोड़ा, सीड़े आदि बनाए गए। साथ ही अपने परिवार और क्षेत्र की खुशहाली तथा अच्छी फसल के लिए कामना की। जयसाण थोक के सयाणा सरदार सिंह रावत ने बताया कि क्षेत्र में लाल धान की रोपाई व निराई के बाद दो सप्ताह चलने वाले सावन के मेले की शुरुआत जागमाता खलाड़ी से हुई। जबकि मेले का समापन देवता के थान पुजेली में होगा। खलाड़ी गांव के रावत जाति के ग्रामीण देवता के वजीर होते हैं। वहीं देवता के थान पुजेली गांव के नौटियाल जाति के ग्रामीण देवता के पुजारी हैं। जो मेले सहित मंदिर में देवता की हमेशा पूजा अर्चना करते हैं। मेले में थोकदार व मंदिर समिति अध्यक्ष जवाहर सिंह रावत, जगमोहन सिंह रावत, फकीर चन्द, रविन्द्र सिंह, राम नारायण सिंह, पुजारी श्यालिकराम नौटियाल, मोहन लाल आदि देवता की पालकी के साथ ही गांव-गांव भ्रमण कर रहे हैं। इस मौके पर बलदेव भंडारी, विनोद रतूड़ी, प्रधान अंकित रावत, महिपाल सिंह, धीरपाल रावत, मनोज रतूड़ी, चौन सिंह, गोपाल सिंह भंडारी, विनोद रतूड़ी, गुरुप्रसाद रतूड़ी आदि मौजूद थे।

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