SC ने कहा प्रशांत भूषण का जवाब ज़्यादा अपमानजनक ,कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

अवमानना मामले में प्रशांत भूषण की सज़ा पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. सुप्रीम कोर्ट की आपराधिक अवमानना के 2020 के मामले में वकील प्रशांत भूषण को सजा सुनाने के मुद्दे पर अटार्नी जनरल से उनकी राय मांगी गई. जिस पर अटारनी जनरल ने कहा कि भूषण का ट्वीट यह बताने के लिए था कि ज्यूडिशरी को अपने अंदर सुधार लाने की जरूरत है, इसलिए भूषण को माफ कर देना चाहिए. अटार्नी जनरल ने कहा कि वकील प्रशांत भूषण सुप्रीम कोर्ट के ख़िलाफ़ दिए अपने सभी बयान वापस ले लेगें, ऐसे में उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया जाए.

सुनवाई में दिलचस्प बात यह रही कि सुप्रीम कोर्ट भूषण के वकील राजीव धवन से ही पूछ रहा है कि आप सलाह दीजिए कि भूषण को क्या सजा दी जानी चाहिए? धवन ने कहा कि अटार्नी जनरल ने सलाह दी है कि भूषण को चेतावनी देकर छोड़ देना चाहिए. मैं इसके पक्ष में भी नहीं हूं. मेरा कहना है कि सिंपल स्टेटमेंट के साथ भूषण को छोड़ देना चाहिए.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भूषण ने सोमवार को कोर्ट में जो अपना अतिरिक्त बयान दाखिल किया है उसमें उम्मीद थी कि अपने रवैये में भूषण कुछ सुधार करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने अटार्नी जनरल को संबोधित करते हुए कहा कि हमने भूषण को मौका दिया था. गलती हमेशा गलती होती है और संबंधित व्यक्ति को यह महसूस होना चाहिए. कोर्ट की मर्यादा है भूषण ने कहा कि मैं माफी नहीं मांगूगा.

अटार्नी जनरल ने कहा कि मीडिया में उनके बयान छप रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी और के बयान का हवाला मत दीजिए. इससे इस कार्रवाई पर असर नहीं पड़ेगा. गणमान्य लोग कुछ कह रहे हैं, इस पर चर्चा क्यों करें. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें सिर्फ इससे मतलब कि आप क्या कह रहे हैं. भूषण के वकील धवन क्या कह रहे हैं.

भूषण के वकील राजीव धवन ने कहा कि वह (प्रशांत भूषण) अपना बयान पढ़ना चाहते हैं, कोर्ट ने कहा हमने पढ़ लिया है, इसकी जरूरत नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने अटार्नी जनरल से कहा कि आप यह बताइए कि अगर सज़ा देनी हो तो क्या दें. अटार्नी जनरल ने कहा कि आप कह दीजिए कि वह भविष्य में ऐसा बयान न दें.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम जानते हैं कि दुनिया में कोई भी पूर्ण नहीं है. गलती सब से होती है, लेकिन गलती करने वाले को इसका एहसास तो होना चाहिए. हमने उनको अवसर दिया, लेकिन उन्होंने कहा कि माफी नहीं मांगना चाहते.

अटार्नी जनरल ने कहा कि भूषण को लगता है कि उन्होंने गलत नहीं किया. कोर्ट मानती है कि गलत किया है. आप चेतावनी देकर जाने दीजिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर उन्हें यह लगता है कि उन्होंने गलत नहीं किया तो हमारी बात का क्या लाभ होगा. यह कैसे सुनिश्चित होगा कि वह भविष्य में ऐसा नहीं करेंगे. अटार्नी जनरल ने कहा कि भूषण भविष्य में ऐसा नहीं करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तो ऐसा उन्हें कहना चाहिए. वह ऐसा कहते तो मामला सरल था. लेकिन उन्होंने अपने ट्वीट को सही ठहराना शुरू कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट ने अटारनी जनरल से कहा कि वह भूषण का बयान पढ़ें जिसमें कहा गया है कि सुप्रीम ख़त्म हो गया है, जो कि बेहद आपत्तिजनक है. जस्टिस अरुण मिश्रा ने अटॉर्नी जनरल से सवाल किया, अगर भूषण ने कोई गलती नहीं की है तो चेतावनी किस बात की दी जाए? सुप्रीम कोर्ट ने एजी से कहा कि आपने खुद भूषण के खिलाफ अवमानना ​​दायर की थी जब भूषण ने आप पर अदालत को गुमराह करने का आरोप लगाया था. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि मैंने उस केस को वापस ले लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि, लेकिन भूषण द्वारा खेद व्यक्त करने के बाद केस वापस लिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भूषण ने इस संस्था, इस अदालत के न्यायाधीशों के खिलाफ कई अपमानजनक टिप्पणियां की हैं. यहां तक ​​कि रामजन्मभूमि मामले में भी, उस मामले से जुड़े केवल एक न्यायाधीश सेवानिवृत्त हुए है, बाकी अभी भी इस अदालत में हैं.

वकील राजीव धवन ने भूषण के बचाव में दलील दी कि ‘ मैंने तो जजों और न्यायपालिका के बारे में बहुत कुछ लिखा है, बोला है. आलोचना किया है. सैकड़ों आर्टिकल लिखे हैं!’ उन्होंने कहा कि अगर भूषण को सजा हुई तो यह न्यायपालिका के लिए काला दिन होगा. एक वकील के तौर पर भूषण ने न्यायपालिका और देश के लिए बहुत किया है. उनका योगदान बहुत है.

धवन ने कहा कि संसद की आलोचना होती है, लेकिन वह विशेषाधिकार की शक्ति का कम इस्तेमाल करते हैं. सुप्रीम कोर्ट को भी भली मंशा से की गई आलोचना को उसी तरह लेना चाहिए. चीफ़ जस्टिस एस ए बोबडे एक बाइक पर बैठे थे, सबने देखा. उस पर टिप्पणी अवमानना न समझें. इतिहास 4 पूर्व CJI के बारे में फैसला लेगा. यह कहना अवमानना नहीं माना जाना चाहिए.

धवन ने प्रशांत भूषण का अतिरिक्त बयान सुनवाई के रिकॉर्ड से हटाने के सवाल पर कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए. आइंदा ऐसा बयान न देने की चेतावनी भी नहीं दी जानी चाहिए। क्या किसी को भविष्य में आलोचना से रोका जा सकता है. अगर कोर्ट इस केस को बंद करना चाहता है तो कह सकते हैं कि वकील कोर्ट की आलोचना करते समय संयम रखें.

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