मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान के दक्षिणी शहर मीनाब से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के संयुक्त हमले की चपेट में एक छात्राओं का प्राइमरी स्कूल आ गया, जिसमें 40 छात्राओं की मौत हो गई है। वहीं 60 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना है।
पहले 24 छात्राओं के मारे जाने की खबर आई थी, लेकिन बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर 40 बताई गई। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, हमले के समय बच्चियां स्कूल में पढ़ाई कर रही थीं। धमाके से स्कूल की इमारत को भी भारी नुकसान पहुंचा है। राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचकर मलबे में फंसी छात्राओं को निकालने का प्रयास कर रहे हैं। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
मीनाब, होर्मोजगान प्रांत में स्थित है और यहां ईरान के अर्धसैनिक बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ का एक अड्डा भी मौजूद है। माना जा रहा है कि सैन्य ठिकाने को निशाना बनाते हुए किया गया हमला पास स्थित स्कूल तक पहुंच गया। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
स्कूल पर हमले के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सेना ने इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। साथ ही खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया है। इससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले के बाद कहा कि उनका अभियान ईरानी शासन के खिलाफ है, न कि ईरान की जनता के खिलाफ। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘ऐतिहासिक नेतृत्व’ के लिए सराहना की और कहा कि ईरानी शासन को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि मौजूदा ईरानी शासन लंबे समय से इजरायल और अमेरिका के खिलाफ उकसावे की नीति अपनाता रहा है। उन्होंने कहा कि संयुक्त कार्रवाई का उद्देश्य “अस्तित्वगत खतरे” को समाप्त करना है और इससे ईरानी जनता को अपना भविष्य स्वयं तय करने का अवसर मिलेगा।
स्कूल पर हमले की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। यदि नागरिक ठिकानों को नुकसान पहुंचने की पुष्टि होती है, तो यह संघर्ष और गंभीर मानवीय संकट का रूप ले सकता है। फिलहाल क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और विश्व समुदाय शांति की अपील कर रहा है।

