नई दिल्ली:
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि अब देश में स्लीपर कोच बसें सिर्फ ऑटोमोबाइल कंपनियों या केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त इकाइयों द्वारा ही बनाई जाएंगी। यह कदम स्लीपर बसों में लगातार हो रही आग की घटनाओं को रोकने के लिए उठाया गया है।
गडकरी ने बताया कि जो स्लीपर बसें पहले से सड़कों पर चल रही हैं, उनमें भी अब जरूरी सुरक्षा उपकरण लगाना अनिवार्य होगा। इनमें शामिल हैं –
- आग लगने का पता लगाने वाला सिस्टम
- इमरजेंसी लाइटिंग सिस्टम
- ड्राइवर की नींद आने का संकेत देने वाला इंडिकेटर
- इमरजेंसी एग्जिट और कांच तोड़ने के लिए हथौड़े
सरकार ने साफ किया है कि स्लीपर कोच बसों को अब AIS-052 बस बॉडी कोड का पालन करना होगा। यह एक राष्ट्रीय मानक है, जिससे बसों की डिजाइन, मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।
पिछले छह महीनों में स्लीपर कोच बसों में आग लगने की छह बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें करीब 145 लोगों की जान चली गई। जांच में सामने आया कि कई बसों में न तो इमरजेंसी खिड़कियां थीं और न ही आग से बचाव के उपकरण।
नितिन गडकरी ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस इलाज योजना शुरू करेंगे।
हादसे के बाद पीड़ित को 7 दिन तक अधिकतम ₹1.5 लाख तक का मुफ्त इलाज मिलेगा।
घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले लोगों को नकद इनाम भी दिया जाएगा।
सरकार वाहन-से-वाहन (V2V) कम्युनिकेशन तकनीक पर भी काम कर रही है। इससे गाड़ियां एक-दूसरे से जानकारी साझा करेंगी और ड्राइवर को समय रहते खतरे की चेतावनी मिलेगी, जिससे हादसों में कमी आएगी।
