वॉशिंगटन/तेहरान, 27 जनवरी:
अमेरिका का विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन और उसके साथ 3 युद्धपोत मिडिल ईस्ट पहुंच गए हैं। यह कदम अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कई बार चेतावनी दी है कि अगर वहां प्रदर्शनकारियों पर हिंसा होती है, तो सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।
📌 क्या कहा अमेरिकी राष्ट्रपति ने:
- ट्रंप ने कहा कि जहाजों को सिर्फ एहतियात के तौर पर भेजा गया है।
- उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका के पास बड़े बेड़े की ताकत मौजूद है, लेकिन इसका इस्तेमाल जरूरी नहीं होगा।
📌 ईरान में हालात:
- ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 5,973 लोग मारे गए और 41,800 से अधिक हिरासत में लिए गए।
- ईरान का आधिकारिक आंकड़ा कम है, जिसमें 3,117 मौतें बताई गई हैं।
📌 अमेरिका की सैन्य तैयारी:
- USS अब्राहम लिंकन पर कई फाइटर जेट्स हैं, जैसे F-35 और F/A-18।
- तीन युद्धपोतों में सैकड़ों मिसाइलें मौजूद हैं, जिनमें टॉमहॉक लैंड अटैक क्रूज मिसाइलें भी शामिल हो सकती हैं।
- अमेरिकी एयर फोर्स का F-15E स्ट्राइक ईगल जेट भी क्षेत्र में तैनात है।
- दर्जनों अमेरिकी मिलिट्री कार्गो प्लेन भी मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहे हैं।
इस क्षेत्र में अमेरिका की गतिविधियाँ पिछले साल की तरह हैं, जब न्यूक्लियर साइट्स पर हमले की आशंका में अमेरिका ने एयर डिफेंस हार्डवेयर भेजा था। तब ईरान ने जवाब में अल उदीद एयर बेस पर मिसाइलें दागी थीं।
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने विमानवाहक पोत और युद्धपोत भेजकर ईरान पर दबाव बढ़ा दिया है। स्थिति तनावपूर्ण है और क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से सभी की नजरें अमेरिकी और ईरानी कार्रवाइयों पर टिकी हैं।

