90 के दशक में बॉलीवुड में कदम रखने वाली एक्ट्रेस रुखसार रहमान ने शोहरत से ज्यादा अपनी मां की जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी। जब करियर उड़ान भर सकता था, तब उन्होंने कैमरे से दूरी बना ली — लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। सालों बाद उन्होंने ऐसी वापसी की कि दर्शक भी चौंक गए।
रुखसार को 1991 की फिल्म ‘सनम बेवफा’ में सलमान खान के साथ फीमेल लीड के रूप में कास्ट किया गया था। उन्होंने कुछ दिन शूटिंग भी की, लेकिन कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों से परिवार के असहज होने के कारण उन्हें फिल्म छोड़नी पड़ी। बाद में यही रोल एक्ट्रेस चांदनी को मिला और फिल्म सुपरहिट साबित हुई।
“मैं 3-4 दिन की शूटिंग कर चुकी थी, लेकिन हालात ऐसे बने कि फिल्म छोड़नी पड़ी। दिलचस्प बात यह है कि किरदार का नाम रुखसार ही रखा गया।”
करियर के शुरुआती दौर में ही रुखसार ने शादी की और सिर्फ 19 साल की उम्र में मां बन गईं। वैवाहिक जीवन आसान नहीं रहा। हालात इतने मुश्किल हुए कि उन्हें अपनी 8 महीने की बेटी आयशा को लेकर अलग जीवन शुरू करना पड़ा।
उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपनी बेटी की परवरिश के लिए उन्होंने अपने होमटाउन में कपड़ों का बुटीक खोला और जिंदगी को नए सिरे से खड़ा किया।
लंबे ब्रेक के बाद रुखसार ने 2005 के आसपास इंडस्ट्री में वापसी की। दिलचस्प बात यह रही कि 17 साल बाद उन्हें सलमान खान के साथ फिर काम करने का मौका मिला — लेकिन इस बार फिल्म ‘गॉड तुस्सी ग्रेट हो’ (2008) में वह उनकी बहन मधु प्रजापति के किरदार में नजर आईं।
उन्होंने इस अनुभव को याद करते हुए कहा था कि इतने साल बाद सलमान के साथ काम करना बेहद खास था।
वापसी के बाद रुखसार ने धीरे-धीरे खुद को एक मजबूत कैरेक्टर आर्टिस्ट के रूप में स्थापित किया। वह कई बड़ी फिल्मों में नजर आईं, जैसे:
✔️ पीके
✔️ उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक
✔️ 83
✔️ खुदा हाफिज: चैप्टर 2
टीवी दर्शकों ने भी उन्हें पसंद किया, खासकर
📺 कुछ तो लोग कहेंगे
📺 तुम्हारी पाखी
ओटीटी पर भी उन्होंने दम दिखाया। वह चर्चित वेब सीरीज़ ‘द गॉन गेम’ और ‘द नाइट मैनेजर’ में नजर आ चुकी हैं।
रुखसार की बेटी आयशा अहमद भी अब एक्टिंग की दुनिया में सक्रिय हैं और वेब शोज़ के जरिए अपनी पहचान बना रही हैं। रुखसार हमेशा खुलकर कहती हैं कि उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि उनकी बेटी है।
रुखसार रहमान की कहानी सिर्फ एक अभिनेत्री की नहीं, बल्कि एक मजबूत मां, संघर्षशील महिला और दूसरा मौका पाने वाली कलाकार की कहानी है। उन्होंने साबित किया कि
सपने भले देर से पूरे हों, लेकिन अगर हिम्मत हो तो सफर फिर से शुरू किया जा सकता है।

