सूबे की चौथी विधानसभा का आखिरी सत्र अंजाम तक पहुंचा; आखिरी सत्र नेता सदन, मुख्यमंत्री धामी

सूबे की चौथी विधानसभा का आखिरी सत्र अंजाम तक पहुंचा। आखिरी सत्र नेता सदन, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का इस भूमिका में पहला सत्र था। धामी अब तक के सबसे युवा मुख्यमंत्री हैं, मगर पूरे छह दिन उन्होंने जो परिपक्वता दिखाई, वह काबिल ए तारीफ है। सत्तापक्ष के विधायकों का ध्यान रखना तो ठीक, मगर धामी ने जिस तरह विपक्ष कांग्रेस के सदस्यों के साथ अपनापन दिखाया, उसने सबको कायल कर दिया। विपक्ष के विधायकों हरीश धामी, मनोज रावत, ममता राकेश ने सरकार का ध्यान खींचने के लिए विधानसभा में धरना दिया, मगर महफिल लूट ले गए धामी। कांग्रेस विधायकों को धरने से उठा, हाथ थाम कार्यालय ले गए, उनकी बात सुनी। सबको अनायास नारायण दत्त तिवारी याद आ गए। तिवारी भी कुछ इसी तरह विपक्ष को साथ लेकर आगे बढ़ते दिखते थे। अब सियासत में धामी की धमक महसूस हो रही है, तो लाजिमी है।हरक सिंह रावत सूबे की सियासत के हरफनमौला हैं। हरफनमौला, मतलब सभी पाॢटयों से गुजर कर अपनी क्षमता प्रदर्शित करने वाला नेता। भाजपा, कांग्रेस से लेकर बसपा तक का सफर कर अब घर वापस लौट चुके हैं।  इन दिनों चर्चा में इसलिए हैं कि फिर विधानसभा चुनाव लडऩे की इच्छा अंगड़ाई लेने लगी है। कुछ अर्सा पहले हरक ने रिटायरमेंट लेने की बात कही थी। चार महीने के मुख्यमंत्री तीरथ के लिए अपनी विधानसभा सीट छोड़ लोकसभा जाने की हसरत भी दिखाई। अब तीरथ ही निकल लिए तो हरक की इच्छा भला कैसे पूरी होती। आलम यह कि अपने विधानसभा क्षेत्र में बहनों से राखी बंधवाने के बाद इंटरनेट मीडिया में मांग करवा रहे हैं कि अगला चुनाव भी हरक कोटद्वार से ही लड़ें। अब दिग्गज नेता हैं, तो टिकट मिल ही जाएगा, मगर सवाल यह खड़ा हो रहा है कि उनका मन इतनी जल्दी भला कैसे बदल गया।

हरीश रावत मौजूदा दौर में उत्तराखंड के सबसे तजुर्बेकार सियासतदां हैं। हरदा के सियासी पैंतरों का अंदाजा कोई नहीं लगा पाता। कांग्रेस हो या भाजपा, उनके हर कदम पर सतर्क रहते हुए नजर रखते हैं। दिल्ली में फिलहाल कांग्रेस कहीं नहीं दिखती, लिहाजा हरदा ने तय कर लिया कि उत्तराखंड में ही बाकी सियासत की जाए। दरअसल, पंजाब के प्रभारी रहते हुए उन्हें इतने पापड़ बेलने पड़े कि हरदा को लगता है कि अब घर की ही सियासत की जाए तो बेहतर है। देहरादून में मीडिया को मन की बात बता दिल्ली पहुंचे, तो सोनिया गांधी से मिलने से पहले ही पंजाब कांग्रेस के मुखिया सिद्धू ने कांग्रेस की ईंट से ईंट बजा डालने का एलान कर डाला। हरदा भौचक्के, मगर किसी तरह क्रिकेट की आड़ ले मोर्चा संभाला। बोले, सिद्धू क्रिकेटर हैं, चौके-छक्के लगाते रहते हैं, सब संभाल लेंगे। हरदा, कांग्रेस के जो छक्के छूट रहे, उसे कैसे संभालेंगे।विधानसभा के हालिया सत्र में दो बार ऐसे मौके आए, जब विपक्ष के विधायक भाजपा के राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी की तारीफ करने से खुद को रोक नहीं पाए। पहले कांग्रेस के धारचूला से विधायक हरीश धामी ने बलूनी के देहरादून-दिल्ली मार्ग पर डाटकाली से मोहंड तक के क्षेत्र में मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए किए गए प्रयासों का उल्लेख किया। दरअसल, धामी सदन में अपने क्षेत्र में कमजोर मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या का जिक्र कर रहे थे। फिर निर्दलीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उनकी सराहना की। उन्होंने सरकार को बलूनी की कोशिशों से सबक लेते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार को कदम उठाने की नसीहत दी। अमूमन ऐसा कम ही देखने में आता है कि जनप्रतिनिधि धुर विरोधी पार्टी के नेता की इस तरह सदन में प्रशंसा करें।

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