कांग्रेस महासचिव हरीश रावत और राज्यसभा सदस्य व भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी के मध्य इंटरनेट मीडिया पर छिड़ी जंग नहीं थमरी

पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत और राज्यसभा सदस्य व भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी के मध्य इंटरनेट मीडिया पर छिड़ी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। बलूनी ने पूर्व मुख्यमंत्री को फिर से निशाने पर लेते हुए लिखा, ‘अल्मोड़ा वाले हरदा ऐसे नहीं थे, मगर जबसे हरदा हरद्वारी लाल बने, तब से उनके द्वारा अपनी सोच और समझ आमूलचूल रूप से बदल दी गई है। अब रावत ने भी अपनी पार्टी की तरह ही तुष्टिकरण के हिंदू-मुस्लिम कार्ड को गले में टांग लिया है।’भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख बलूनी ने कहा कि कांग्रेस की शुरुआत ही तुष्टिकरण से हुई।देश का विभाजन हो, कश्मीर की समस्या हो, राम मंदिर के प्रकरण में बाधा डालना हो, उनके अस्तित्व को न्यायालय में नकारना हो, शाहबानो का केस हो या तीन तलाक का मसला, कांग्रेस पार्टी तुष्टिकरण को ही वैतरणी मानकर चलती आई है। ऐसे में रावत का इस राह पर चलना स्वाभाविक ही है।

बलूनी ने कहा कि केवल किसी धर्म विशेष का प्रतीक धारण करने से तुष्टिकरण का आरोप नहीं लग सकता, बल्कि उस एजेंडे पर एक के बाद एक फैसले लेकर हरीश रावत ने अपनी छवि स्थापित की है। मुख्यमंत्री रहते हुए रावत ने ऐसे फैसले लिए, जो तुष्टिकरण की चादर ओढ़े थे। उन्होंने कहा कि रावत ने अप्रत्याशित रूप से विधानसभा की दो सीटों पर तुष्टिकरण के भरोसे ही चुनाव लड़ा।बलूनी ने आगे लिखा, ‘आप बड़े हैं, आदरणीय हैं, आपने अपनी पार्टी के लिए बहुत समय और योगदान दिया है। कांग्रेस की सोच के अनुरूप आपने चुनाव से कुछ माह पहले तुष्टिकरण का एजेंडा परोस दिया है। कांग्रेस शायद इसी के इर्द-गिर्द चुनाव भी लड़ेगी। आप तुष्टिकरण को अलादीन का चिराग मान कर इसी एजेंडे के तहत 2022 के चुनाव में जाना चाह रहे हैं।’

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