आज ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिका और ईरान के बीच विकर्षक न्यूक्लियर डील (परमाणु समझौता) को लेकर महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब दोनों देशों के बीच तनातनी काफी तीव्र हो चुकी है और मध्य पूर्व की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।
बैठक का मकसद और स्थिति
- अमेरिका और ईरान ने ओमान में शुक्रवार को वार्ता करने पर सहमति जताई है।
- बैठक का मुख्य एजेंडा ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना है।
- बैठक की मेज़बानी ओमान के विदेश मंत्री बदर अल बुसैदी करेंगे।
- ईरान की तरफ से अब्बास अराघची, और अमेरिका की ओर से जेरेड कुशनर व स्टीव विटकॉफ हिस्सा ले रहे हैं।
दोनों पक्षों के बीच मतभेद
- अमेरिकी पक्ष चाहता है कि वार्ता में परमाणु के अलावा व्यापक मुद्दों को भी शामिल किया जाए।
- वहीं, ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम बातचीत का हिस्सा नहीं है।
- ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जबकि अमेरिका और इज़राइल पहले उसे हथियार विकसित करने का आरोप लगाते आए हैं।
दोनों देशों के बीच तनातनी इतनी बढ़ चुकी है कि:
- अमेरिका ने अरब सागर में अपनी सेनाओं का जंबो तैनाती कर दी है।
- अमेरिकी लड़ाकू विमानों और नौसेना को सक्रिय कर दिया गया है।
- अमेरिकी बेड़े ने पहले ही एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया है।
- ईरान ने मिसाइल परीक्षण और नया अंडरग्राउंड मिसाइल सेंटर का खुलासा किया है।
ऐसी रिपोर्टें भी आईं कि अमेरिका ने ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के सीक्रेट बंकर को टारगेट किया हुआ है।
इन गतिविधियों को दोनों देशों द्वारा बैठक से पहले अपनी सैन्य ताकत दिखाने की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है।
विश्लेषकों और खाड़ी देशों की चिंताएँ इस प्रकार हैं:
🔹 यदि यह बैठक बिना किसी समझौते के समाप्त हो जाती है, तो
➡️ तनाव और अधिक बढ़ सकता है।
➡️ क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ सकता है।
➡️ खाड़ी देशों में सुरक्षा चिंताएँ बढ़ जाएँगी।
➡️ तेल और ऊर्जा की कीमतों में उछाल आ सकता है।
कुछ सतर्क विश्लेषकों का कहना है कि बैठक के नाकाम होने के बाद सैन्य कार्रवाई की संभावनाएँ भी कम नहीं लगाई जा सकतीं, लेकिन यह कहना अभी कठिन है कि क्या अमेरिका खामेनेई के बंकर या किसी और प्रमुख लक्ष्य पर हमला करेगा।
इस बैठक को आखिरी मौका या संवेदनशील मोड़ बताया जा रहा है:
✔️ अगर चर्चा सकारात्मक दिशा में जाती है,
➡️ तो न्यूक्लियर डील दोबारा जी उठ सकती है,
➡️ क्षेत्रीय तनाव कम हो सकता है,
➡️ वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर हो सकता है।
✔️ अगर बैठक निष्कर्षहीन रहती है,
➡️ तनाव बढ़ेगा,
➡️ सुरक्षा जोखिम बढ़ेंगे,
➡️ संभावित सैन्य मुठभेड़ की आशंका भी हो सकती है।

