शपथ ग्रहण समारोह में आकर्षण का केंद्र रही उत्तराखंड संस्कृति झलक ;जाने पूरी खबर

शपथ ग्रहण समारोह में अरविंद पांडेय, गणोश जोशी और रेखा आर्य खास आकर्षण का केंद्र रहे। तीरथ कैबिनेट के एकमात्र सदस्य अरविंद पांडेय ने संस्कृत में शपथ ग्रहण की, जबकि शपथ लेने के बाद पूर्व फौजी रहे गणोश जोशी ने एक सैनिक की तरह सैल्यूट कर समारोह में मौजूद व्यक्तियों का दिल जीत लिया। वहीं, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रेखा आर्य शपथ ग्रहण समारोह में पारंपरिक कुमाऊंनी परिधान पहनकर पहुंची।

तीरथ कैबिनेट के एकमात्र सदस्य अरविंद पांडेय ने संस्कृत में शपथ ग्रहण की। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने उन्हें संस्कृत में ही शपथ दिलवाई। उनके शपथ लेते ही समारोह स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार में मंत्री रहे अरविंद पांडेय के पास विद्यालयी शिक्षा के साथ संस्कृत शिक्षा का प्रभार भी था। संस्कृत शिक्षा मंत्रलय रहते हुए उन्होंने विधानसभा भवन में सभी मंत्रियों की नामपट्टिकाएं संस्कृत में लिखे जाने की पहल भी की थी। संस्कृत में शपथ ग्रहण को उन्होंने द्वितीय राजभाषा को सम्मान दिलाने के अपने प्रयासों से जोड़ा। इस दौरान वह पूरी तरह गर्व से परिपूर्ण दिखे।

कैबिनेट मंत्री बने मसूरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक गणोश जोशी का उत्साह देखते ही बना। पूर्व फौजी रहे गणोश जोशी शपथ ग्रहण के मौके पर फौजी टोपी पहनकर पहुंचे। शपथ लेने के बाद उन्होंने एक सैनिक की तरह सैल्यूट कर समारोह में मौजूद व्यक्तियों का दिल जीत लिया। समारोह में उन्होंने खूब तालियां बटोरीं। शपथ लेने के बाद जोशी भावुक भी हो गए। उन्होंने कहा कि एक सैनिक होने पर वह हमेशा से गर्व महसूस करते रहे हैं। राजनीति में भी वह एक सिपाही के तौर पर जनता के बीच सक्रिय रहते हैं। उन्होंने कहा कि एक सिपाही को बड़ा सम्मान मिला है। ये उनके जीवन का सबसे अच्छा पल है।

राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रेखा आर्य शपथ ग्रहण समारोह में पारंपरिक कुमाऊंनी परिधान पहनकर पहुंची। पिछौड़ा (चुनरी), गले में गुलबंद व हंसुली, हाथ में पौंची, नाक में बड़ी कुमाऊंनी नथ, मांग टीका, घाघरा समेत लोक परिधानों में सज-धज कर पहुंची रेखा आर्य ने कहा कि वह पहले भी बतौर मंत्री उत्तराखंड परिधान ‘म्यर पहचान’ अभियान का हिस्सा रही हैं। त्रिवेंद्र सरकार में भी महिला सशक्तीकरण व बाल विकास मंत्री रहते हुए उन्होंने पारंपरिक लोक परिधानों को बढ़ावा दिया। उत्तराखंड में लोक परंपरा और परिधानों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।

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