Work From Home: भविष्य का राजमार्ग या पगडंडी

कल केंद्र सरकार ने दिसंबर 2020 तक वर्क फ्रॉम होम का दिशा निर्देश दिया है| प्राइवेट सेक्टर और कॉर्पोरेट सेक्टर मे यह भावना तेजी से उभर रही है कि वर्क फ्रॉम होम की दिशा और दशा को किस तरह से अमलीजामा पहनाया जाये क्योकि पारम्परिक भारतीय मन-मस्तिष्क ऑफिस मे कार्य करने मे रचा बसा है| कोरोना क्राइसिस ने सारे सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक समीकरणों को अस्त व्यस्त कर दिया है| घर से बाहर ओफ्फिसो मे काम करना अब संभव नही दिखता| विचारणीय यह है की वर्क फ्रॉम होम क्या भविष्य का राजमार्ग है या इसके अपने खतरे है |
वर्क फ्रॉम होम के कुछ फायदे है|दिल्ली, मुंबई और पूना जैसे शेहरो मे यात्रा समय और ट्रेवल की थकान दोनो कम हुए है| साथ ही घर मे परिवार के साथ मनोविनोद का समय भी बड़ा है| पर्यावरण प्रदुषण भी इन शेहरो मे कम हुआ है| कॉर्पोरेट बिल्डिंग्स के भारी भरकम किराये से भी काफी हद तक निजात मिली है|आईटी प्रोफेशनल्स अपने कार्य को अधिक ऊर्जा और समयबध्यता के साथ पूर्ण कर रहे है|भागदौड़ की ज़िन्दगी से राहत मिलने के कारण कंपनिया टारगेट्स और कार्य संस्कृति को भी रिडिफाइन कर रही है|
कोरोना के दौर मे वर्क फ्रॉम होम एक बड़ा परिवर्तन है| पश्चिम की दृष्टि मे इसकी सुरुवात कमोवेश 1970 के दशक से होने लगी थी किन्तु भारत जैसे विकासशील समाज के लिए यह आज एक चुनौती है|इसके लिए आवश्यक स्किल्स, संसाधन व घर मे स्पेस निकलना भी एक चुनौती है|कुछ बुद्धिजीवी इसे प्राइवेसी पर हमला मानते है और ऑफिस के सरदर्द का घर पर होलसेल ट्रांसफर भी|सीनियर्स का प्रत्यक्ष मार्गदर्शन कम मिलने से भी कई परेशानिया खड़ी हो रही है| कॉर्पोरेट सेक्टर मेएम्प्लॉयेर और एम्प्लॉय के बीच सेवा एक अनुबंध है| हायर और फायर की पॉलिसी से अनेक मैनेजरस और अन्य स्टाफ की नौकरिया इस वर्ष के शुरू से ही समाप्त हो रही है| ऐसी स्थिति मे दुविधा की वजह से कर्मचारी का उत्साह हमेशा दमाडोल रहता है|
वर्क फ्रॉम होम के लिए अभी भारतीय समाज और कॉर्पोरेट परिपक्व नही है|केवल wipro, TCS जैसी कंपनियों मे इसे बखूबी इस्तेमाल किया जा रहा है|इनका लक्ष्य 2025 तक वर्क फ्रॉम होम की कार्य संस्कृति को अपनी इकाइयों मे पूरी तरह से लागू करना है|
कहना यह है की वर्क फ्रॉम होम की कुछ आल इंडिया गाइडलाइन्स और स्टैण्डर्ड प्रोटोकॉल हमे डेवलप करने होंगे|कर्मचारियों के हितो को भी सुरक्षित रखना होगा| ऑनलइन शिक्षा, कम्युनिकेशन, दक्षताए, स्पीड चारो इस राजमार्ग के स्तम्भ रहेंगे| वर्क फ्रॉम होम को भारत जैसे विकास शील समाज मे लागू करने के अपने खतरे और चुनौतियां बहुत है| संभल कर कदम ताल करना होगा|

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