
दांतों की सड़न, मसूड़ों की बीमारी, और सांसों की दुर्गंध, सूखा मुंह इसके अलावा, स्लीप एपनिया जैसी गंभीर स्थितियों से भी जुड़ी हो सकती है। जी हाँ मुंह खोलकर सोने से कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं जैसे –
चेहरे के विकास पर असर:
बच्चों में, मुंह खोलकर सांस लेने से चेहरे और जबड़े के विकास पर असर पड़ सकता है, जिससे ठुड्डी धँसी हुई या कमज़ोर हो सकती है और जबड़े की रेखा कम हो सकती है।
नाक बंद होना:
नाक बंद होने के कारण, जैसे कि सर्दी, फ्लू, या एलर्जी, लोग मुंह से सांस लेने लगते हैं। ।
सांसों की दुर्गंध:
मुंह सूखने से बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं, जिससे सांसों में दुर्गंध आ सकती है।
स्लीप एपनिया:
स्लीप एपनिया में, गले में कोमल ऊतक सिकुड़ जाते हैं, जिससे सांस लेने में रुकावट आती है और मुंह खोलकर सांस लेना पड़ता है।
सूखा मुंह:
मुंह खोलकर सोने से लार कम बनती है, जिससे मुंह सूख जाता है।
दांतों की सड़न:
मुंह में सूखापन बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देता है, जिससे दांतों की सड़न और मसूड़ों की बीमारी हो सकती है।
कुछ मामलों में, नाक के बीच का विचलन या उपास्थि विभाजक भी मुंह से सांस लेने का कारण बन सकता है।