अरब सागर में Iran और United States के बीच हालात फिर से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। दोनों देशों के बीच सीजफायर टूटने के बाद सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।
अमेरिका के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, Arabian Sea में एक ईरानी झंडे वाले कार्गो जहाज को रोकने की कोशिश की गई। यह जहाज Bandar Abbas की ओर बढ़ रहा था और Strait of Hormuz पार कर चुका था।
अमेरिकी नौसेना के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Spruance (DDG-111) ने जहाज को कई बार चेतावनी दी, लेकिन जहाज के चालक दल ने इसे नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद अमेरिकी युद्धपोत ने कार्रवाई करते हुए 5-इंच MK-45 तोप से फायरिंग की और जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाया, जिससे उसकी गति रुक गई।
बाद में अमेरिकी मरीन (31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट) ने जहाज पर चढ़कर उसे अपने कब्जे में ले लिया। फिलहाल जहाज अमेरिकी हिरासत में है।
अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई “सोच-समझकर और नियमों के तहत” की गई। नाकेबंदी के दौरान अब तक 25 से अधिक वाणिज्यिक जहाजों को या तो वापस लौटने या रास्ता बदलने के निर्देश दिए गए हैं।
इस घटना के बाद Iran ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरान का कहना है कि उसने अमेरिकी सैन्य जहाजों को ड्रोन हमलों से निशाना बनाया। हालांकि, इस पर अभी तक United States की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। यहां बढ़ता तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
अरब सागर में यह टकराव ऐसे समय हो रहा है जब पहले से ही क्षेत्रीय हालात संवेदनशील बने हुए हैं। एक ओर अमेरिका अपनी नाकेबंदी को सख्ती से लागू कर रहा है, तो दूसरी ओर ईरान भी जवाबी कदम उठा रहा है।
स्थिति तेजी से बदल रही है और अगर कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह टकराव बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

