यूरोप के देश Sweden के Södertälje शहर में सफाई को लेकर एक अनोखा प्रयोग किया जा रहा है। यहां कौवों को ट्रेनिंग देकर सड़कों से सिगरेट के टुकड़े (बट) उठवाए जा रहे हैं और बदले में उन्हें खाने के लिए दाना दिया जाता है। यह प्रयोग पर्यावरण संरक्षण और शहर की सफाई के लिए शुरू किया गया है।
इस अनोखे प्रयोग के पीछे Corvid Cleaning नामक स्टार्टअप का हाथ है। कंपनी ने एक ऑटोमैटिक मशीन तैयार की है, जो कौवों के व्यवहार और मनोविज्ञान को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
इस प्रक्रिया में कौवा सड़क से सिगरेट का टुकड़ा उठाता है और उसे सड़क किनारे लगी मशीन या डस्टबिन में डाल देता है। मशीन उस कचरे की पहचान करती है और सही वस्तु मिलने पर कौवे के लिए मूंगफली का दाना बाहर निकाल देती है।
अगर कौवा सिगरेट के टुकड़े की जगह पत्थर या पत्ते जैसी चीज डाल देता है, तो मशीन उसे कोई इनाम नहीं देती।
वैज्ञानिकों के अनुसार कौवे कोर्विड परिवार के पक्षी होते हैं और इन्हें दुनिया के सबसे बुद्धिमान जीवों में गिना जाता है। वे जल्दी सीखते हैं और एक-दूसरे को देखकर नई चीजें अपनाने की क्षमता रखते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी समझ और सीखने की क्षमता लगभग 7 साल के बच्चे के बराबर होती है, इसलिए वे रिवॉर्ड सिस्टम को आसानी से समझ लेते हैं।
आंकड़ों के मुताबिक स्वीडन की सड़कों पर हर साल 1 अरब से ज्यादा सिगरेट के बट फेंके जाते हैं, जिन्हें साफ करने में काफी खर्च आता है।
इस परियोजना के संस्थापक Christian Günther‑Hansen का कहना है कि कौवों की मदद से सफाई का खर्च करीब 75% तक कम किया जा सकता है।
हालांकि इस प्रयोग को लेकर कुछ पर्यावरणविदों ने चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि सिगरेट के टुकड़ों में मौजूद निकोटीन और अन्य जहरीले तत्व पक्षियों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।
इस पर कंपनी का कहना है कि वे पक्षियों पर लगातार नजर रख रहे हैं और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कौवे कचरे को सिर्फ मशीन में डालें, उसे खाएं नहीं।
कंपनी के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया स्वैच्छिक है और कौवों को मजबूर नहीं किया जाता। वे खुद ही सीख लेते हैं कि मशीन में सिगरेट का टुकड़ा डालने पर उन्हें खाने का इनाम मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रयोग सफल रहा, तो भविष्य में दुनिया के कई शहरों में पक्षियों की मदद से सफाई अभियान चलाए जा सकते हैं।\

