नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच अहम बातचीत हुई है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ BRICS से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की।
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि उनकी ईरानी समकक्ष के साथ एक और बातचीत हुई, जिसमें दोनों देशों के आपसी संबंधों और ब्रिक्स से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में Iran, Israel और United States के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण क्षेत्रीय हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। फरवरी 2026 के अंत से शुरू हुए इस टकराव के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू की है, जिससे रणनीतिक समुद्री मार्ग Strait of Hormuz की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत संभालता है और भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
बताया जा रहा है कि जयशंकर और अराघची के बीच यह चौथी अहम बातचीत है। इससे पहले 28 फरवरी, 5 मार्च और 10 मार्च को भी दोनों नेताओं के बीच फोन पर चर्चा हो चुकी है। इन वार्ताओं में मुख्य रूप से क्षेत्रीय संघर्ष, समुद्री शिपिंग की सुरक्षा और भारतीय जहाजों तथा तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही पर ध्यान केंद्रित किया गया था।
ईरानी पक्ष ने इन वार्ताओं के दौरान अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों को आक्रामकता करार देते हुए अपने आत्मरक्षा के अधिकार पर जोर दिया। साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता के लिए ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों से समर्थन की भी अपील की।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। तेल की कीमतों में तेजी आई है और कई समुद्री शिपिंग मार्ग प्रभावित हुए हैं। भारत ने इस पूरे संकट के दौरान ईरान के साथ संतुलित संबंध बनाए रखते हुए इजरायल के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी भी जारी रखी है।
भारत और ईरान के बीच संबंध Chabahar Port, ऊर्जा व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर आधारित हैं। ऐसे में संकट के समय दोनों देशों के बीच लगातार उच्च-स्तरीय संपर्क बनाए रखना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम माना जा रहा है।

