प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हुगली नदी पर स्थित एपीएसईजेड (अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड) के हल्दिया बल्क टर्मिनल (HBT) को औपचारिक रूप से राष्ट्र को समर्पित किया। 4 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) की क्षमता वाला यह पूरी तरह ऑटोमेटेड ड्राई बल्क कार्गो टर्मिनल भारत के पूर्वी समुद्री गलियारे में माल परिवहन के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा साबित होगा। इससे उद्योग और व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है।
हुगली नदी के पश्चिमी तट पर स्थित यह आधुनिक टर्मिनल आयातित कोयला और अन्य ड्राई बल्क वस्तुओं के प्रबंधन के लिए तैयार किया गया है। भारत के ड्राई बल्क आयात का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा पूर्वी तट से आता है, जिसमें कोयला, बॉक्साइट और चूना पत्थर शामिल हैं। ऐसे में हल्दिया टर्मिनल पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के इस्पात, एल्यूमीनियम और बिजली उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री प्रवेश द्वार बनेगा।
एपीएसईजेड के पूर्णकालिक निदेशक और सीईओ अश्वनी गुप्ता ने कहा कि हल्दिया बल्क टर्मिनल एक अगली पीढ़ी की सुविधा है, जिसमें पूर्ण मशीनीकरण और सीधे रेल निकासी की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि यह टर्मिनल पूर्वी तट पर दक्षता का नया मानक स्थापित करेगा और आधुनिक मल्टीमॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने के प्रधानमंत्री मोदी के विजन को मजबूत करेगा।
कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट के हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स के भीतर स्थित इस परियोजना को ‘डिज़ाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण’ (DBFOT) मॉडल के तहत 30 साल के रियायत समझौते के अंतर्गत विकसित किया गया है। परियोजना का निर्माण 14 जुलाई 2023 को शुरू हुआ था और इसे निर्धारित समय के भीतर पूरा कर दिया गया।
इस टर्मिनल में 2000 टन क्षमता का रेलवे वैगन लोडिंग सिस्टम (RWLS) और 1.54 किलोमीटर लंबी विशेष रेलवे लाइन विकसित की गई है, जिससे जहाज़ से सीधे ट्रेन में माल लोड किया जा सकेगा। इसके अलावा आधुनिक कन्वेयर सिस्टम, ऑटोमेटेड स्टॉकयार्ड प्रबंधन के लिए स्टैकर-कम-रिक्लेमर और जहाज़ों से माल उतारने के लिए मोबाइल हार्बर क्रेन जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं भी स्थापित की गई हैं।
रेलवे वैगन लोडिंग सिस्टम और विशेष रेलवे लाइन इस टर्मिनल की सबसे बड़ी विशेषताएं हैं। इनके माध्यम से जहाज़ों से उतरे भारी माल को सीधे रेलवे वैगनों में लोड कर मुख्य रेल लाइनों से जोड़ा जा सकेगा, जिससे जहाज़ों के रुकने का समय कम होगा और औद्योगिक ग्राहकों तक कच्चे माल की आपूर्ति तेज़ और सस्ती होगी।
हल्दिया टर्मिनल भारत के ‘सागरमाला कार्यक्रम’ और ‘पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ के उद्देश्यों को भी आगे बढ़ाता है। इन योजनाओं के तहत देश में बंदरगाह आधारित मल्टीमॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर लॉजिस्टिक्स लागत कम करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस टर्मिनल का उद्घाटन पूर्वी समुद्री तट के आधुनिकीकरण के रणनीतिक महत्व को दर्शाता है।
अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) अडानी समूह की प्रमुख कंपनी है, जो एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स सेवाएं प्रदान करती है। कंपनी भारत के पश्चिमी, दक्षिणी और पूर्वी तटों पर 15 बंदरगाहों और टर्मिनलों का संचालन करती है। इसके पास 127 जहाजों का समुद्री बेड़ा, 12 मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, 3.1 मिलियन वर्ग फुट के गोदाम और 25 हजार से अधिक ट्रकों का नेटवर्क है। वर्तमान में APSEZ की वार्षिक कार्गो हैंडलिंग क्षमता 633 मिलियन टन है, जो भारत के कुल बंदरगाह वॉल्यूम का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा है।

